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Tuesday, July 17, 2012

(इंटनेटीय जासूस ) विश्वास न हो तो अभी ही एक प्रयोग करें ?

चंडीगढ़.चंडीगढ़ का अमित  हर दिन अपनी गर्लफ्रेंड से रात में सोते वक्त वीडियो चैट पर रोमैंटिक बातें करता है। बार-बार अपनी प्रेमिका को ‘आई लव यू’ कहता है। चैट पर ही किस लेता है।    तभी बगल वाले कमरे में सोए अभिजीत के पिता कहते हैं, बेटा आधी रात में किससे बात कर रहे हो? अब सो भी जाओ कल तुम्हारी परीक्षा है। अभिजीत अपने पिता से कहता है, नहीं पापा किसी से बात नहीं कर रहा हूं। बस अपने दोस्त से स्टडी मटेरियल के लिए बात कर रहा था।

 
यहां तो अमित  अपने पापा से झूठ बोल लेता है लेकिन इंटरनेटीय जासूस से नहीं बच पाता है। अमित  और उसकी गर्लफ्रेंड की हर बात सुनी जा रही है। इसका पता धीरे-धीरे  अमित को भी हो जाता है। उसके जी-मेल अकाउंट पर कई तरह के मैसेज आने लगते हैं। मसलन उसकी गर्लफ्रेंड की पसंदीदा जगहें, जिन गाड़ियों या ड्रेस को पसंद करती है या फिर शादी के बाद जहां हनीमून मनाना चाहती है इनसे जुड़ी ट्रैवल एजेंसियों, शॉपिंग सेंटरों और प्रोडक्टों के मेल आने लगते हैं।
 
पहले तो अभिजीत महीनों हैरत में रहा कि आखिर यह हो क्या रहा है। इन सारे सीक्रेट की जानकारी इन्हें कैसे पता है। वह कई दिनों तक अपनी गर्लफ्रेंड पर शक करता रहा कि कहीं मीनाक्षी किसी और से तो बात नहीं करती है। बाद में उसे इंटरनेटीय जासूस के बारे में पता चला तो वह दंग रह गया।

केस नंबर दो
पिछले हफ्ते अमृतसर के समीर  ने पोर्नोग्राफी वीडियो देखा। उसने तुरंत अपने ब्राउजर हिस्ट्री साफ करके मुक्ति पा ली। लेकिन यह समीर का भ्रम है कि उसके अलावे किसी और को पता नहीं है कि उसने पोर्नोग्राफी वीडियो देखा है। समीर की हरकत इंटरनेटीय जासूसों से नहीं बची। अगले दिन वह अपने ई-मेल पर कई पोर्नोग्राफिक वेबसाइट और मर्दानगी बढ़ाने वाली दवाओं के विज्ञापनों से दो चार हुआ तो उसकी आखें झेंप गईं। हालांकि समीर ने कुछ ज्यादा दिमाग नहीं लगाया और अपनी हरकत जारी रखा। उधर इंटनेटीय जासूस भी अपनी हरकतों में जुटे हैं।

केस नबंर तीन
जालंधर की परमजीत  कौर ने पैथोलॉजी लैब की वेबसाइट पर जाकर अपनी एक्सरे रिपोर्ट देखी और अगले ही दिन उनके ई-मेल अकाउंट पर स्पैम मेल का सिलसिला लग गया। तरह-तरह की काल्पनिक बीमारियों से मुक्ति दिलाने वाले उत्पादों और हॉस्पिटलों की सेवाओं के बारे में अपडेट किया जाने लगा। परमजीत सोचने लगीं कि जिस बात को उन्होंने अपने घर में भी किसी के नहीं बताया, वह इंटरनेट पर इतनी आम कैसे हो गई?

विश्वास न हो तो अभी ही एक प्रयोग करें  
यदि आपको इन बातों पर यकीन नहीं हो रहा है तो आज ही एक प्रयोग करें। गूगल अकाउंट लॉगइन करने के बाद अपने इंटरनेट ब्राउजर में किसी खास किस्म की पांच-सात वेबसाइटों के देख डालिए। मसलन यात्रा से संबंधित वेबसाइटें, किताबें से जुड़े ठिकाने या फिर सेहत से जुड़ी सेवाएं। फिर सबको बंद करने के बाद नए सिरे से लॉगइन कर ई-मेल सर्फिंग शुरु कीजिए। हो सकता है कुछ ही क्षण में आपकी नजर उसी क्षेत्र से जुड़े ऐसे विज्ञापन दिखाई देंगे। जाहिर है कि इंटरनेट पर जिन गतिविधियों को आप अपने बंद कमरे के भीतर चुपचाप बैठकर अंजाम दे रहे थे, वे कहीं न कहीं पूरी तरह बेपर्दा थी।

4 comments:

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